
सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *हमारी सांस्कृतिक परंपरा, शुभता और नवचेतना का प्रतीक है एवं गुड़ी पड़वा हमें नए संकल्प लेने, अपने जीवन में लक्ष्यों को अपनाने और समृद्धि की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। उक्त विचार खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सागर में विक्रम संवत् 2083 के शुभारंभ पर सृष्टि आरंभ दिवस एवं कोटि सूर्योपासना और नाट्य मंचन आयोजन कार्यक्रम में स्थानीय रविंद्र भवन में व्यक्त किए। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी, डॉ. वीरेंद्र पाठक, सुखदेव मिश्रा, अपर कलेक्टर अविनाश रावत, एसडीएम अमन मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन, विनय दुबे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, संस्कृत विद्यालय के बटुक, जनसमुदाय, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद थे। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि गुड़ी पड़वा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है। यह हमें एकता, सद्भाव और समृद्धि का संदेश देता है। यह दिन नए संकल्प लेने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। चैत्र प्रतिपदा नव संवत्सर का यह पर्व प्रकृति की हरितिमा और नवजीवन का प्रतीक है। यह समय दो ऋतुओं का संधि काल है, जिसमें प्रकृति नया रूप धारण करती है। यह तिथि ऐतिहासिक भी है, इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का प्रारंभ किया था। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि सनातन संस्कृति की ध्वजा हर काल और हर युग में हमारी पहचान रही है। सम्पूर्ण विश्व भारतीय संस्कृति और परंपरा के महत्व को स्वीकार करता है। भगवा ध्वज और तिरंगे के साथ युद्ध काल में अपने स्वाभिमान और देश के गौरव की रक्षा के अनेक उत्कृष्ट उदाहरण इतिहास में मौजूद हैं। गुड़ी पड़वा और नववर्ष सभी के लिए उत्साह, उमंग और आनंद का पर्व है।मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के कालखंड में सनातन संस्कृति के देवालय भव्यता के साथ विकसित हुए। सम्राट विक्रमादित्य ने गुड़ी पड़वा का महत्व स्थापित किया। वे न्यायप्रियता, दानवीरता और सुशासन की उत्कृष्ट मिसाल हैं। वर्तमान दौर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इसी धारा को आगे बढ़ा रहे हैं। व्यक्तित्व में वीरता का गुण निडरता से आता है और निडरता के लिए मन का भय समाप्त करना आवश्यक है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1 करोड़ 1 लाख रुपए राशि का अंतरराष्ट्रीय सम्मान आरंभ किया है। यह देश का सबसे बड़ा पुरस्कार है। सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवोन्मेष, भारतीय दर्शन, धर्म, परंपरा के प्रचार-प्रसार, रचनात्मक और जनकल्याणकारी कार्यों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए स्थापित इस पुरस्कार हेतु गुड़ी पड़वा से नामांकन आमंत्रित किए जा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दानवीरता, सुशासन, मानव कल्याण, सर्वधर्म समन्वय जैसे मूल्यों को राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।श्याम तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित कर संस्कृति, धर्म एवं परंपरा का ज्ञान नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हमारी नई पीढ़ी धर्म, संस्कृति और परंपरा को जाने और उसका सम्मान करे। इस अवसर पर विनय दुबे प्राचार्य सांदीपनि विद्यालय, एमएलबी सागर, आर.एस. दीक्षित, उमाकांत गौतम प्राचार्य संस्कृत महाविद्यालय धर्मश्री, प्रवीण जोशी प्राचार्य सरस्वती शिशु मंदिर पगारा, सत्यम मिश्रा, पं. आशुतोष गर्ग, पंडित आनंद तिवारी प्राचार्य रावतपुरा संस्कृत महाविद्यालय वेदांती सागर, पंडित दीनानाथ मिश्रा, दामोदर प्रजापति, पंडित रामकृष्ण गर्ग अध्यक्ष संत पुजारी संघ, मित्र गुरु शामिल थे। संस्कृति मंत्रालय, भोपाल के निर्देश पर रविंद्र भवन में रंग थिएटर सागर द्वारा केंद्र नाटक का श्री बृजेश रिछारिया के निर्देशन में मंचन किया गया। कार्यक्रम में अपर कलेक्टर अविनाश रावत एवं एसडीएम अमन मिश्रा ने मुख्य अतिथि मंत्री राजपूत को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। मंत्री राजपूत ने सभी कलाकारों को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती रचना तिवारी ने किया एवं आभार के.के. मिश्रा ने व्यक्त किया।




